टॉयलेट बनाना सरकार का काम नहीं है – अक्षय कुमार

Its not Government Job to make Toilet says Akshay Kumar

अभिनेता अक्षय कुमार इन दिनों अपनी मच अवेटेड फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। यह फिल्म 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पिछले दिनों फिल्म से जुड़े एक प्रमोशनल इंटरव्यू में हमारी मुलाकात अक्षय कुमार से हुई। इस मुलाकात में अक्षय कुमार ने हमें अपनी फिल्म के बारे में काफी कुछ बताया। अक्षय कुमार ने क्या बताया हमसे अपनी फिल्म के बारे में चलिए जानते हैं।

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पंकज पाण्डेय

फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ क्या है ?

‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ एक मसाला फिल्म है जिसमें आपको कॉमेडी, रोमांटिक सांग्स, लव स्टोरी और भरपूर एक्शन देखने को मिलेगा। यह फिल्म लगभग ढाई घंटे लगातार आपका मनोरंजन करती रहेगी। इस फिल्म के जरिए मैं किसी को कुछ सीखा नहीं रहा हूं, बस फिल्म देखने के बाद शायद सभी को पता चल जाएगा कि मैं इस फिल्म के जरिए क्या कहना चाहता हूं। फिल्म अंतिम में सिर्फ 20 मिनट थोड़ा सा सीरियस हो जाती है बाकी यह पूरी फिल्म एक हास्य फिल्म है।

इस फिल्म के जरिए आप किस समस्या को दिखा रहे हैं ?

यह फिल्म स्वछता की सोच को लेकर बनाई गयी है। हमने इस फिल्म के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि किसी भी घर में जिस तरह टीवी, पंखें और बाकी सारी चीजें जरुरी हैं उसी तरह एक टॉयलेट का होना भी काफी जरुरी है। आज भी हमारे देश में लगभग 54 प्रतिशत लोगों के घर में टॉयलेट नहीं है और इसका असर महिलाओं पर ज्यादा पड़ता है। आज भी कई गावों में महिलाएं सूरज उगने से पहले शौच के लिए लगभग तीन किलोमीटर से भी ज्यादा दूर जाती हैं और सूर्यास्त के बाद भी उन्हें उसी जगह दोबारा जाना पड़ता है। महिलाओं के खुले में शौच करने से कई लोग महिलाओं के शौच करते हुए वीडियो बनाते हैं तो कुछ लोग फोटो खींचते हैं और कुछ महिलाएं तो रेप का शिकार भी हो जाती हैं। मुझे यह समझ में नहीं आता कि ये वही लोग होते हैं जो अपने घर की महिलाओं को परदे में रखते हैं फिर उन्हें छोड़ देते हैं कि वो जाकर खुले में शौच करें। मुझे यकीन है कि यह फिल्म लोगों की सोच में  जरूर बदलाव लाएगी।

ऐसा कहा जाता है कि सरकार टॉयलेट बनाने के लिए जो फंड्स देती है वो फंड्स जरुरत मंद लोगों तक पहुंच ही नहीं पाता, इस बारे में क्या कहेंगे ?

देखिए, मेरा मानना है कि टॉयलेट बनाना सरकार का काम नहीं है। अगर सरकार टॉयलेट बना रही है तो अच्छी बात है लेकिन अगर किसी कारण वश सरकार के फंड्स जरुरत मंदों को नहीं मिल रहे हैं तो लोगों को खुद अपने लिए टॉयलेट बनाना चाहिए। जिस तरह लोग अपनी जरुरत की चीजें और सामान अपने घर में रखते हैं उसी तरह उन लोगों को अपने घर में टॉयलेट की व्यवस्था करनी चाहिए। लोगों को सरकार के फंड्स का इंतजार नहीं करना चाहिए। मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें सरकार ने टॉयलेट बनाकर दिया था लेकिन अब उन्होंने उस जगह को अनाज के गोदाम बना लिए हैं तो कुछ ने तो उन्हें अपनी दुकान बना ली है।

पिछले दिनों खबर थी कि फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ तमिल फिल्म ‘जोकर’ की रीमेक है, इस पर आप क्या कहना चाहते हैं ?

मेरी यह फिल्म किसी भी फिल्म की रीमेक नहीं है। हमारी फिल्म यूपी, बिहार और राजस्थान जैसे अलग-अलग शहरों से ली गई रियल स्टोरी पर बेस्ड है। ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ सामाजिक मुद्दे पर बात करती हुई एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है और अगर अलग शब्दों में कहूं तो हमारी फिल्म एक लव स्टोरी फिल्म है। फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से भी प्रेरित है।

पिछले कुछ सालों में आप देशभक्ति वाली फ़िल्में कर रहे हैं जिसमें बेबी, एयरलिफ्ट, रुस्तम जैसी फ़िल्में शामिल हैं, इस बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

सच कहूं तो देशभक्ति से जुड़ी हुई फ़िल्में करने का मेरा कोई मकसद नहीं है। मुझे जिस तरह की फ़िल्में ऑफर हो रही हैं, मैं उस तरह की फ़िल्में कर रहा हूं। मैंने पिछले साल ‘हॉउसफुल 3’ जैसी कॉमेडी फिल्म भी की थी। आने वाले दिनों में मैं ‘रोबोट 2’ फिल्म कर रहा हूं जिसमें मेरा किरदार बिलकुल ही अलग है। इसके अलावा मैं ‘पैडमैन’ जैसी भी फ़िल्में भी कर रहा हूं जो कि काफी सीरियस मुद्दे पर आधारित है तो ऐसा कुछ नहीं है कि मैं सिर्फ देशभक्ति वाली ही फ़िल्में कर रहा हूं।

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