रिव्यू – अच्छे सब्जेक्ट पर बनी कमजोर फिल्म है ‘लखनऊ सेंट्रल’

Film Lucknow Central is weak film but made on the good subject
फिल्म – लखनऊ सेंट्रल

स्टारकास्ट – फरहान अख्तर, डायना पेंटी

डायरेक्टर – रंजीत तिवारी

प्रोडूयसर – निखिल आडवाणी, वायकॉम 18

रेटिंग – 3 स्टार

 
 
पंकज पाण्डेय

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फरहान अख्तर स्टारर फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। कैसी है फिल्म चलिए जानते हैं।

स्टोरी

फिल्म की कहानी उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद शहर की है जहां किशन गिरहोत्रा (फरहान अख्तर) अपने बूढ़े बाप के साथ रहता है। किशन को गाने का बहुत शौक है और वो अपना खुद का एक बैंड बनाना चाहता है। किशन भोजपुरी गायक मनोज तिवारी का बहुत बड़ा फैन है और एक दिन किशन मनोज तिवारी के कॉन्सर्ट में मनोज तिवारी को अपनी सीडी देने जाता है लेकिन कॉन्सर्ट में किशन की धक्का-मुक्की एक आईएस ऑफिसर से हो जाती है। कॉन्सर्ट के दूसरे दिन किशन को उस आईएस ऑफिसर के मर्डर के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता है। किशन कोर्ट को बताता है कि वो बेकसूर है लेकिन कोर्ट किशन को उम्र कैद की सजा सुना देती है। लगभग डेढ़ साल की सजा काटने के बाद किशन का ट्रांसफर मुरादाबाद जेल से लखनऊ सेंट्रल में कर दिया जाता है। लखनऊ सेंट्रल में एक प्रोग्राम का आयोजन होने वाला है जिसमें जेल के कैदियों को अपना-अपना बैंड बनाकर पंद्रह अगस्त के दिन परफॉरमेंस देनी है। लखनऊ सेंट्रल में यह प्रोग्राम एनजीओ वर्कर गायत्री कश्यप (डायना पेंटी) की देख-रेख में होने वाला है। किशन गायत्री को कहता है कि वो उसे लखनऊ सेंट्रल में बनने वाले बैंड का वालंटियर बना दे और वो जल्द से जल्द से अपने और साथी बना लेगा। किशन जेल में बाकी अपने दोस्तों को बैंड में शामिल होने के लिए यह शर्त रखकर मना लेता है कि बैंड बनाना तो बहाना असली उद्देश्य तो जेल से भाग जाना है। अब क्या किशन अपने साथियों के साथ जेल से फरार होने में सफल हो पाएगा। इस सवाल का जवाब आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।

डायरेक्शन

फिल्म को डायरेक्ट रंजीत तिवारी ने किया है और अगर उनके डायरेक्शन की बात करें तो रंजीत का डायरेक्शन ठीक ही है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बढ़िया है लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है। फिल्म का फर्स्ट पार्ट ठीक है लेकिन सेकंड हाफ अट्रैक्ट नहीं करता। इसके अलावा फिल्म के क्लाइमेक्स में भी दम नहीं है जो कि फिल्म को काफी कमजोर बनाता है। फिल्म का म्यूजिक भी औसत दर्जे का है।

परफॉरमेंस

परफॉरमेंस की बात करें तो फरहान अख्तर ने बढ़िया एक्टिंग की है। पंजाबी एक्टर गिप्पी ग्रेवाल का भी अभिनय ठीक है। दीपक डोब्रियाल, राजेश शर्मा, इनामउलहक और रॉनित रॉय का भी अभिनय ठीक है। डायना पेंटी ने भी फिल्म में बढ़िया परफॉरमेंस दी है। एक्टर रवि किशन ने अपने छोटे से रोल में लाजवाब अभिनय किया है।

क्यों देखें

फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ एक ऐसी है फिल्म है जिसमें दिखाया गया है कि किसी को भी कभी जीवन में न्याय नहीं मिलता। बस कुछ लोगों का गुड लक होता है और कुछ लोगों का बैड लक। फिल्म देखने के बाद हम कह सकते हैं कि ‘लखनऊ सेंट्रल’ एक अच्छे सब्जेक्ट पर बनी कमजोर फिल्म है फिर भी एक बार आप यह फिल्म देख सकते हैं।
 
 
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