मैं सिर्फ एक ही इंडस्ट्री जानती हूं – पार्वती

I know only one industry says Parvathy
मलयालम एक्ट्रेस पार्वती इन दिनों अपनी आने वाली पहली हिंदी फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ 10 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। हाल ही में हमारी मुलाकात पार्वती से हुई और हमने उनसे उनकी फिल्म के बारे में काफी बातचीत की। पेश हैं बातचीत के कुछ खास अंश।
 
 
पंकज पाण्डेय
 
 
आपने इस फिल्म के लिए हां क्यों कहा ?
 
मेरे लिए इस फिल्म को करने की सबसे खास वजह थी फिल्म की कहानी जो कि मुझे काफी पसंद आई थी। मुझे याद है जब मैं इस फिल्म की कहानी सुन रही थी उस वक्त मुझे काफी हंसी आ रही थी क्योंकि सच में फिल्म की कहानी काफी हास्यस्पद है। इसके अलावा फिल्म की डायरेक्टर तनुजा चंद्रा जिनके साथ मैं काम करना चाहती थी। अगर तनुजा जी यह फिल्म किसी और भाषा में भी बनाती तो भी मैं यह फिल्म करती क्योंकि मुझे तनुजा जी के साथ काम करना था। मैं यह भी कहना चाहूंगी कि मैंने कभी भाषा को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है, अगर मुझे मराठी, बंगाली या फिर भोजपुरी भाषा की भी फ़िल्में ऑफर हुई और मुझे फिल्म की कहानी पसंद आई तो मैं फिल्म साइन कर लूंगी।
 
 
आपके लिए बॉलीवुड इंडस्ट्री नयी है, इस बारे में क्या कहेंगी ?
 
देखिए, मेरे लिए कोई भी इंडस्ट्री नयी नहीं है क्योंकि मैं सिर्फ एक ही इंडस्ट्री जानती हूं और वो है इंडियन फिल्म इंडस्ट्री। मुझे सब इंडस्ट्री एक जैसी ही लगती है इसलिए मैंने तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी फ़िल्में की हैं। मैंने सिर्फ आज तक कोई तेलुगु फिल्म नहीं की है क्योंकि मुझे आज तक तेलुगु भाषा की फिल्मों के जो भी ऑफर आए उसकी स्क्रिप्ट में वो बात नहीं थी। मेरे अनुसार सभी इंडस्ट्री में एक ही जैसा काम हो रहा है और वो फिल्म बनने का तो फिर सभी इंडस्ट्री एक-दूसरे से अलग कैसे हुई। मैंने हिंदी की फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ उसी तरह शूट की है जिस तरह मैंने अपनी पिछली अठारह फ़िल्में शूट की है।
 
 
इरफ़ान खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?
 
इरफ़ान के साथ काम करने का अनुभव मजेदार रहा। इरफ़ान काफी बेहतरीन अभिनेता हैं और जब आपका को स्टार बेहतरीन होता है तो काम करने में और भी ज्यादा मजा आता है। इरफ़ान के साथ काम करने के बाद काफी कुछ सीखने को मिला, ऐसा अनुभव रहा जैसे में एक्टिंग के स्कूल में हर दिन कुछ नया सीख रही हूं।
 
 
इरफन खान की एक बुरी आदत बताइए, जो आपने नोटिस की हो?
 
मैंने इरफ़ान के साथ ज्यादा समय नहीं बिताया है इसलिए मुझे नहीं पता कि उनमें बुरी चीज क्या है लेकिन मुझे उनके साथ काम करते वक्त अपने बारे में एक चीज बहुत बुरी लगी। मुझे लगता था कि मैं ही सिर्फ डायरेक्टर से बहुत सारे सवाल पूछती हूं लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि इरफ़ान मुझसे भी ज्यादा सवाल डायरेक्टर से पूछते हैं। सच कहूं तो सवाल पूछना कोई बुरी बात नहीं है। मुझे लगता है कि मुझे उनके अंदर की बुरी बात जानने के लिए उनके साथ एक और फिल्म करनी होगी।
 
 
आपके लिए किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले हीरो ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होता है या फिर डायरेक्टर ?
 
मेरे लिए सबसे पहले इम्पोर्टेन्ट है फिल्म की कहानी और उसके बाद मैं पूछती हूं कि डायरेक्टर कौन है क्योंकि डायरेक्टर ही आपका कैप्टेन होता है। मैंने आज तक कभी किसी भी फिल्म करने से पहले हीरो के बारे में नहीं सोचा क्योंकि मैं हीरो को ज्यादा इम्पोर्टेंस नहीं देती। मुझे जब ‘करीब करीब सिंगल’ ऑफर हुई थी उस वक्त मुझे नहीं पता था कि मेरे अपोजिट हीरो कौन है। मुझे फिल्म की कहानी पसंद आई और मैंने फिल्म साइन कर ली।
 
 
बॉलीवुड के तीनों खान्स में से आप किसे पसंद करती हैं ?
 
मेरा कोई फेवरेट नहीं है इसका यह मतलब नहीं है कि मैं काफी डिप्लोमेटिक हूं। तीनों का अपना-अपना चार्म और पॉपुलैरिटी है। तीनों की अपनी-अपनी ताकत है और अपनी-अपनी कमजोरी है इसलिए मुझे कौन सा खान पसंद है, यह कह पाना मेरे लिए काफी कठिन है।  
 
 
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