मैं अपने बेबाक अंदाज को काफी पसंद करती हूं- रिचा चड्ढा

I Like my Straight Forward Nature says Richa Chadda

एक्ट्रेस रिचा चड्ढा इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘फुकरे रिटर्न्स’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। यह फिल्म 8 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पिछले दिनों हमारी मुलाकात रिचा चड्ढा से हुई और हमने उनसे उनकी फिल्म को लेकर काफी बातचीत की। पेश हैं उस बातचीत के कुछ अंश।

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पंकज पाण्डेय
 
 

आप फिल्म में अपने किरदार भोली पंजाबन से कितनी मिलती-जुलती हैं ?

मैं रियल लाइफ में न तो भोली पंजाबन जैसी हूं और ना ही बनना चाहती हूं क्योंकि भोली एक क्रिमिनल है जो नशे का व्यापार करती है। रिश्वत लेती है और किडनैपिंग भी करती है इसलिए मैं रियल लाइफ में कभी भोली पंजाबन नहीं बनना चाहूंगी। इसके साथ ही भोली पंजाबन की एक भी ऐसी क्वॉलिटी नहीं है जो मुझसे मिलती-जुलती है।

 
 
फिल्म के कुछ सीन तिहाड़ जेल में शूट हुए हैं, जेल में फिल्म शूट करने का अनुभव कैसा रहा ?
 
जी हां, यह सच है कि इस फिल्म के लिए मैंने तिहाड़ जेल में शूट किया है लेकिन मुझे जेल में शूट करने में बिल्कुल भी मजा नहीं आया। मैंने गेट और जेल के बीच के हिस्से में ही शूट किया है। मैंने किसी कैदी के साथ कोई वक्त नहीं बिताया। जेल की दुनिया बिल्कुल अलग होती है, वहां हर कैदी की अपनी ड्यूटी होती है और जेल में सिंगिंग और डांसिंग कम्पटीशन भी होता है। वैसे तो जेल में शूट करने का मेरा अनुभव काफी इंटरेस्टिंग था लेकिन मैंने उस मूमेंट को ज्यादा एन्जॉय नहीं किया।
 
 

फिल्म ‘फुकरे’ में आपके किरदार को काफी पसंद किया गया, ऐसे में ‘फुकरे रिटर्न्स’ में अपने किरदार की सफलता को लेकर कितनी नर्वस हैं?

 

सच कहूं तो शूटिंग के दौरान मैं काफी नर्वस थी क्योंकि मुझे भी लगता था कि इस बार कैसे करूंगी क्योंकि ऑडियंस को मेरा किरदार काफी पसंद आया था लेकिन अब जब फिल्म बन गयी है और फिल्म के ट्रेलर और गाने को लोग पसंद कर रहे हैं तो कॉन्फिडेंस आ रहा है। इसके अलावा जब फिल्म की स्क्रिप्ट अच्छी होती है और आपकी फिल्म का डायरेक्टर, प्रोडूयसर और एडिटर अच्छा होता है तो फिल्म भी अच्छी बन जाती है इसलिए मैं बिल्कुल भी नर्वस नहीं हूं।

 

फिल्म ‘फुकरे’ में आपका किरदार ग्रे था और इस बार भी ग्रे ही नजर आ रहा है, इस पर क्या कहेंगी ?


मेरे मुताबिक फिल्म ‘फुकरे’ में मेरा किरदार ग्रे नहीं था लेकिन ‘फुकरे रिटर्न्स’ में मेरा किरदार बेशक ग्रे है लेकिन मैं आपको बता दूं कि इस बार फिल्म में मुझसे भी बड़ा विलेन कोई है जिसे ट्रेलर में अभी तक दिखाया नहीं गया है। शायद आने वाले दिनों में ट्रेलर में उस विलेन की झलक दिखाई जाए।

 
 
इंडस्ट्री में टैलेंट से काम मिलता है या फिर पहचान से ?


देखिए, टैलेंट से भी काम मिलता है और पहचान से भी। फर्क बस इतना है कि पहचान से आपको काम जल्दी मिल जाएगा लेकिन हमारी इस इंडस्ट्री में टैलेंट के बल पर और अपने साथ वसूल लेकर चलने से काम पाने में वक्त लगता है लेकिन इतना पक्का होता है कि काम मिलता जरूर है। मैं पहचान से मिलने वाले काम को भी गलत नहीं मानती क्योंकि अगर आपको किसी की पहचान से काम मिल रहा है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है।

 
आप काफी स्ट्रेट फॉरवर्ड हैं, इससे आपको कितना नुकसान और फायदा हुआ है ?
 
अपने स्ट्रेट फॉरवर्ड नेचर से मुझे कितना फायदा और नुकसान हुआ है ये बता पाना तो मुश्किल है लेकिन हां मैं इतना जरूर कहूंगी कि मैं अपने बेबाक अंदाज को काफी पसंद करती हूं। मुझे लोगों के सामने अपनी बात रखना और अपनी राय देना अच्छा लगता है।  वैसे भी हमारा देश हमें फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का अधिकार देता है तो अपनी बात कहने में हमें कतराना नहीं चाहिए, मुझे लगता है मेरी तरह बाकियों को भी अपनी बात रखनी चाहिए, हिचकना नहीं चाहिए।
 
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