हर महिला के अंदर एक पदमावती छुपी हुई है – दीपिका पादुकोण

I always feel that somewhere in every woman there is one Padmavati
पिछले साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘पदमावत’ आखिरकार 25 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। पिछले दिनों फिल्म ‘पदमावत’ की अदाकारा दीपिका पादुकोण से हमने मुलाकात की और उनसे फिल्म से जुड़े कुछ सवाल किए। हमारे सवालों के जवाब में उन्होंने क्या कहा? चलिए जानते हैं।
 
 
पंकज पाण्डेय
 
 

आज आपकी फिल्म ‘पदमावत’ को लेकर पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों ही तरह की कंट्रोवर्सी चल रही है, इस बारे में क्या कहेंगी ?

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मैं या कोई भी एक्टर अपनी फिल्म के लिए कंट्रोवर्सी नहीं चाहता। मेरी फिल्म के प्रति पॉजिटिव या फिर नेगेटिव कंट्रोवर्सी चल रही है इस बारे में मैं नहीं जानतीं। मैं बस इतना जानती हूं कि हमने एक अच्छी फिल्म बनाई है। जब हमारी फिल्म रिलीज होगी और जब लोग फिल्म देखेंगे तो उन्हें फिल्म देखकर गर्व महसूस होगा।
 
 
फिल्म के एक गाने में आपने काफी वजन घाघरा पहना हुआ है, इतने वजन घाघरे को पहनकर गाने को शूट करना कितना मुश्किल था ?
 
जी, गाने को शूट करना काफी मुश्किल था और मैंने घाघरे और जूलरी के वजन को कम करने की डिमांड भी की थी लेकिन मेरी डिमांड को नहीं सुना गया। सच कहूं तो जब मुझे कैमरे में शार्ट देना होता है तो मैं इस बारे में नहीं सोचती। अब जब मीडिया पूछ रही है तो मुझे लगता है कि हां सच में मेरा घाघरा और जूलरी काफी वजन थी लेकिन मैंने कर लिया।
 
 
लोग कहते हैं संजय लीला भंसाली की आप फेवरेट एक्ट्रेस बन चुकी हैं, इस बारे में क्या कहेंगी ?

 
दस साल पहले जब मेरी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ की बॉक्स ऑफिस पर टक्कर संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘सवारियां’ से हुई थी। उस वक्त मैं सोचती थी कि मैं कभी संजय लीला भंसाली की फिल्मों की हीरोइन नहीं बन पाऊंगी, पर आज मैं लगातार संजय लीला भंसाली की तीन फिल्मों की हीरोइन बन चुकी हूं इसलिए मैं आज खुद को लकी मानती हूं। मैं संजयजी का एहसान मानती हूं कि उन्होंने जिस तरह के किरदार मुझे दिए हैं फिर चाहे वो लीला हो, मस्तानी या फिर पदमावती सभी स्ट्रांग किरदार थे। कहीं ना कहीं आज संजय लीला भंसाली की फिल्मों का हिस्सा बनकर अच्छा लगता है।
 
 
पदमावती की कौन सी क्वालिटी आप खुद के अंदर पाती हैं ?
 
काफी क्वालिटी हैं जैसे उनकी इंटेलिजेंस, वीरता और उनका ठहराव क्योंकि इतना कुछ होने के बावजूद भी किस तरह उन्होंने अपने आपको संभाला और सोच समझकर फैसला किया। मैं उनकी वीरता से काफी इंस्पायर हुई हूं। मुझे हमेशा लगता है कि हर महिला के अंदर कहीं ना कहीं एक पदमावती छुपी हुई है।
 
 
आपने इंडस्ट्री में दस साल पूरे कर लिए हैं, इसका श्रेय आप किसे देती हैं ?
 
मैं इसका श्रेय सबसे पहले अपने आपको दूंगी क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। इसके बाद जिन डायरेक्टर्स के साथ मैंने काम किया है उन्हें दूंगी, क्योंकि उन्हीं लोगों ने मुझे कई दमदार किरदार दिए हैं। इसके अलावा मेरे पैरेंट्स और फैंस को भी मैं इसका श्रेय देना चाहूंगी।
 
 
आज इंडस्ट्री की कई नयी अभिनेत्रियां आपको अपना आइडियल मानती हैं, इसे किस तरह देखती हैं ?
 
(हंसते हुए) अच्छा लगता है कि लोग आपको आइडियल मानते हैं लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगी कि मैंने यहां तक पहुंचने के लिए कुछ अलग नहीं किया है। मुझे जो सही लगता था वही किया है। एक वक्त था जब मुझे लगने लगा था कि मुझे हीरोइन बनने के लिए अलग बनना पड़ेगा लेकिन मुझे समझ में आया कि अलग बनकर कुछ फायदा नहीं होने वाला है। फिल्म ‘कॉकटेल’ के बाद ही मुझे समझ आया कि मुझे अब  अपने और काम के प्रति ईमानदार रहना है और मैं जैसी हूं, मुझे वैसे ही रहना है। इसके अलावा समय-समय पर मुझे आत्ममंथन करते रहना होगा तभी ही मैं आगे बढ़ पाऊंगी।   
 
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