रिव्यू – हार्ड वर्क की मीनिंग समझाती है फ़िल्म द ज़ोया फैक्टर

the zoya factor
फ़िल्म – द ज़ोया फैक्टर
स्टारकास्ट – सोनम कपूर आहूजा, दुलकर सलमान
डायरेक्टर – अभिषेक शर्मा
प्रोडूयसर – फॉक्स स्टार स्टूडियो, पूजा शेट्टी, आरती शेट्टी
रेटिंग – 3 स्टार
 
एक्ट्रेस सोनम कपूर आहूजा स्टारर फ़िल्म द ज़ोया फैक्टर अनुजा चौहान की बुक द ज़ोया फैक्टर पर बेस्ड है। यह फ़िल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। कैसी है फ़िल्म चलिए जानते हैं।
स्टोरी
फ़िल्म द ज़ोया फैक्टर मुंबई में रहने वाली और खुद को लूजर समझने वाली ज़ोया सोलंकी (सोनम कपूर आहूजा) की कहानी है। ज़ोया मुंबई की एक एडवरटाइजिंग एजेंसी में जूनियर कॉपी राइटर की पोजिशन पर काम करती है। ज़ोया को लगता है कि वो काफी अनलकी है क्योंकि उसकी लाइफ में कुछ खास नहीं हो रहा है। इसी बीच ज़ोया को इंडियन क्रिकेट टीम के साथ एक एड शूट करने का मौका मिलता है। इस शूट के दौरान ज़ोया की मुलाकात इंडियन क्रिकेट टीम के कप्तान निखिल खोड़ा (दुलकर सलमान) से होती है। निखिल को ज़ोया पहली ही नजर में पसंद आ जाती है। एक रोज निखिल ज़ोया को मैच होने से पहले लंच पर इनवाइट करता है और जोया के साथ लंच करने के बाद इंडिया मैच जीत जाती है। यहीं से शुरु होता है, ज़ोया का लक फैक्टर क्योंकि निखिल के सिवाय टीम के बाकी सदस्यों को लगने लगता है कि ज़ोया टीम के लिए लकी है और अगर पूरे वर्ल्ड कप के दौरान ज़ोया उनके साथ रही तो इंडिया वर्ल्ड कप जीत जाएगी। वहीं दूसरी तरह निखिल को लगता है कि टीम मैच अपनी मेहनत से जीत रही है। अब क्या टीम इंडिया जोया के लक की वजह से वर्ल्ड कप जीत पाएगी और क्या निखिल खुद को सही साबित कर पाएगा कि टीम मैच ज़ोया के लक की वजह से नहीं बल्कि टीम खुद के हार्ड वर्क से जीत रही है। इन सवालों के जवाब आपको फ़िल्म देखने के बाद पता चलेंगे।
डायरेक्शन
फ़िल्म को डायरेक्ट अभिषेक शर्मा ने किया है। उनका डायरेक्शन ठीक है, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक बुक को एक फ़िल्म के रूप में पेश करना काफी कठिन होता है। फ़िल्म का स्क्रीनप्ले ठीक है और सिनेमेटोग्राफी भी बढ़िया है। फ़िल्म का म्यूजिक औसत दर्जे का है।
परफॉर्मेंस
सोनम कपूर आहूजा ने ठीक-ठाक काम किया है। कुछ सीन्स को छोड़ दिया जाए तो सोनम की एक्टिंग बढ़िया है। दुलकर सलमान का भी काम उम्मीद के मुताबिक तो नहीं लेकिन उनकी परफॉर्मेंस को परफेक्ट कहा जा सकता है। संजय कपूर और सिकंदर खेर ने अपने किरदारों के साथ इंसाफ किया है। अनिल कपूर का कैमियो फ़िल्म को सपोर्ट नहीं करता है।
क्यों देखें
द ज़ोया फैक्टर एक हल्की-फुल्की एंटरटेनिंग फ़िल्म है जिसे आप एक बार तो देख ही सकते हैं। इसके अलावा फिल्म हार्ड वर्क की असली मीनिंग समझाती है। इस फ़िल्म को देखने के बाद शायद आप लक पर कम खुद पर ज्यादा भरोसा करने लगेंगे।

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