फिल्म के हीरो राइटर और डायरेक्टर होते हैं – आमिर खान

मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर अभिनेता आमिर खान इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं जो कि आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। हाल ही में हमारी मुलाकात आमिर खान से उनके घर पर हुई जहां उन्होंने हमसे फिल्म को लेकर काफी लंबी बातचीत की। पेश हैं उस बातचीत के प्रमुख अंश।
 
 
पंकज पाण्डेय
 
 
इस फिल्म में आप एक म्यूजिक डायरेक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, अपने किरदार के बारे में कुछ बताए ?
 
फिल्म में जिस तरह का मेरा किरदार है उस तरह का किरदार मैंने आज तक नहीं किया है। जब मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई गयी थी उस वक्त मुझे मेरा किरदार पसंद नहीं आया था। मुझे लगा कि मैं इस किरदार के साथ इंसाफ नहीं कर पाऊंगा लेकिन फिल्म के डायरेक्टर अद्वैत चंदन ने कहा था कि मुझे यह किरदार करना चाहिए। जब मैंने इस किरदार के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया तो मुझे अहसास हुआ कि मैं यह किरदार कर लूंगा। मेरा जो किरदार है वो फिल्म में काफी बद्तमीज है और बच्चों को हमेशा रुलाता है। झूठ बोलता है, लड़कियों से फ़्लर्ट करता है, लोगों की बुराई और अपनी तारीफ़ ज्यादा करता है। यह किरदार मेरे लिए काफी कठिन था और अब मुझे इंतजार है कि ऑडियंस मेरे इस किरदार को देखकर क्या रियेक्ट करती है।
 
 
अद्वैत चंदन की यह पहली फिल्म है, ऐसे में किस तरह उन्होंने आपको अपनी फिल्म करने के लिए राजी करवाया ?
 
फिल्म की स्क्रिप्ट भी मुझे पसंद आई थी लेकिन मुझे फिल्म के लिए हां कहलवाना काफी मुश्किल होता है। मेरा एक सिस्टम है, जब भी मैं नए डायरेक्टर्स के साथ काम करता हूं तो उन्हें कहता हूं कि यह छह सीन हैं जो कि आपकी स्क्रिप्ट में से है। इन सभी छह सीन को शूट करो फिर एडिट करो और जब आपके सीन तैयार हो जाए तो मुझे दिखाओ और तब मुझे पता चल जाएगा कि आपने जो पेपर पर लिखा है वो आपके सीन में भी नजर आ रहा है या नहीं। सीन देखने के बाद मुझे आसानी से पता चल जाता है कि उस इंसान को एडिटिंग आती है या नहीं। जैसे हम एक्टर्स का पहले स्क्रीन टेस्ट लिया जाता है उसी तरह मैं भी पहले डायरेक्टर्स का टेस्ट लेता हूं। वैसे अद्वैत चन्दन एक शार्प माइंडेड इंसान हैं
 
 
इस फिल्म के साथ ‘गोलमाल अगेन’ भी रिलीज हो रही है, ऐसी खबर है कि आपकी फिल्म को कम स्क्रीन्स मिले हैं, इस पर आप क्या कहेंगे ?
 
यह खबर गलत है कि हमारी फिल्म को कम स्क्रीन्स मिल रही हैं। जिस तरह की हमारी फिल्म है उस हिसाब से हमें ठीक-ठाक स्क्रीन मिल रही है। जैसे- जैसे फिल्म की रिलीज डेट करीब आती है वैसे-वैसे स्क्रीन्स फाइनल होती जाती है। जहां तक सिंगल स्क्रीन का सवाल है तो मैं आपको बता दूं कि हमें सिर्फ 150 से 200 स्क्रीन्स ही चाहिए और उतनी हमें मिल रही है। मल्टीप्लेक्स के शोज रिलीज के पहले डिवाइड होते हैं और मल्टीप्लेक्स के मालिक फैसला करते हैं कि उन्हें किस फिल्म को ज्यादा स्क्रीन्स देनी है। मेरे ख्याल से दो फ़िल्में जब रिलीज होती हैं उनके बीच सिर्फ एक दिन का क्लैश होता है क्योंकि एक दिन के बाद पता चल जाता है कि कौन सी फिल्म ऑडियंस देखना चाहती है और फिर सिनेमाघर के मालिक उसके अनुसार स्क्रीन्स डिवाइड कर देते हैं।
 
 
सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाकर क्या स्क्रीन्स की समस्या को ख़त्म किया जा सकता है ?
 
सच कहा आपने, मुझे भी लगता है कि हमारे देश में सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि हमारा देश काफी बड़ा देश है। हमारे देश की जनसंख्या भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है लेकिन सिनेमाघरों की संख्या में ज्यादा इजाफा नहीं हो रहा है। मैं आपको बता दूं कि चाइना में 45000 सिनेमाघर हैं और हमारे देश में 5000 या फिर उससे थोड़ा और ज्यादा ही सिनेमाघर है और अगर हम अपनी तुलना चाइना से करें तो चाइना में पूरे नौ गुने ज्यादा सिनेमाघर हैं।
 
 
इस साल शाहरुख़ की ‘जब हैरी मेट सेजल’ और सलमान की ‘ट्यूबलाइट’ कुछ कमाल दिखा नहीं पाई, इस बारे में आप क्या कहेंगे ?
 
देखिए सक्सेस और फेलियर तो चलता रहता है। एक या दो फ़िल्में फ्लॉप हो जाने से किसी स्टार का करियर खत्म नहीं हो जाता। अगर कोई फिल्म चलती है तो कुछ हद तक ही उसका श्रेय फिल्म के हीरो को जाता है क्योंकि हीरो भी फिल्म का एक हिस्सा होता है। मेरी फिल्म पीके बहुत बड़ी हिट फिल्म थी, आप उसका श्रेय मुझे नहीं दे सकते क्योंकि वो फिल्म मेरी वजह से नहीं चली वो फिल्म चली क्योंकि वो फिल्म अच्छी थी। अगर आपको किसी को उस फिल्म के हिट होने का श्रेय देना ही तो आपको फिल्म के डायरेक्टर या फिर राइटर को देना चाहिए। किसी भी फिल्म के असली हीरो उसके राइटर और डायरेक्टर होते है। बड़े हीरो की वजह से सिर्फ फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग अच्छी मिल जाती है।
 
 
आप अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘थग्स ऑफ़ हिंदुस्तान’ कर रहे हैं, अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?
 
अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव अद्भुत रहा। उनके साथ काम करने के बाद मुझे काफी कुछ सीखने को मिला और उनके बारे में काफी कुछ जानने को भी मिला। अमित जी काफी हार्डवर्किंग एक्टर हैं और अपने काम को लेकर काफी फोकस्ड भी हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि उन्हें क्या करना है। सबसे बड़ी बात यह है कि आज उन्हें इंडस्ट्री में लगभग पचास साल हो गए हैं लेकिन आज भी ऑडियंस उन्हें पसंद करती है और उनसे कनेक्ट होती है।
 
 

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